7TH CENTRAL PAY COMMISSION BRING FORTUNE FOR CENTRAL GOVERNMENT EMPLOYEES: सातवें वेतन आयोग के बाद फिर जायेंगे केंद्रीय कर्मचारियों के दिन
नई दिल्ली : उम्मीद है कि अगले साल जनवरी तक सरकार द्वारा गठित 7वां वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट पेश कर देगा और सरकार इसे तय वक्त पर लागू भी कर देगी । इसके लिए सभी तबकों और वर्गों के सरकारी कर्मचारियों के संगठन अपनी- अपनी मांगें उसके सामने रख रहे है । इस के लिए वेतन आयोग ने 25 मार्च से मौखिक साक्ष्य की कवायद भी शुरू कर दी है । इस कवायद के तहत कर्मचारी संगठन वेतन आयोग से मुलाकात करके अपनी अपनी मांगो के विषय में मौखिक साक्ष्य या तर्क रखते हैं, वेतन आयोग के लिए वेतनमान तय करने से पूर्व यह प्रक्रिया बडी महत्वपूर्ण मानी जाती है । यह प्रक्रिया अप्रैल के दुसरे परववाड़े तक जारी रहने की उम्मीद है । केंद्रीय कर्मचारी बडी बेसब्री से वेतन आयोग की रिपोर्ट का इन्तजार कर रहे हैं और महंगाई के इस दौर में कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग एक वरदान के रूप में साबित होने वाला है । सभी कर्मचारियों को उम्मीद है कि वेतन आयोग इस साल के अंत तक अपनी रिपोर्ट पेश कर देगा और सरकार भी उसे समय पर यानि कि 01.01.2016 तक लागू कर देगी। अब तो सभी कर्मचारियों को इन्तजार है की वेतन कितने गुणा तक बढेगा, अगर पिछले वेतन आयोग देखें जाएँ तो वेतन ढाई से तीन गुना तक बढ़ने के आसार हैं । लेकिन सरकार ने इस साल बजट में इनकम टैक्स में लाभ ना देकर कर्मचारियों के दिलों में यह डर भी बैठा दिया है कि कहीं वेतन आयोग का हाल भी इस तरह से ना हो, कहीं अच्छे दिनों का वायदा करने वाली सरकार उनसे वेतन बढने का मौका छीन ना ले।
परन्तु दूसरी तरफ कर्मचारी संगठनों ने भी सरकार पर दवाब बनाना शुरू कर दिया है हाल ही में सम्पन्न वेतन आयोग की मीटिंग में कर्मचारी संगठनों ने अपनी बात जोरदार तरीके से रखते हुए न्यूनतम वेतन को ILO की दिक्कत के हिसाब से तय करने के मांग भी रखी । अगर वेतन आयोग कर्मचारी संगठनों की इस मांग को मान लेता है तो निश्चित तोर पर वेतन चार गुण तक भी बढ़ सकते है क्योकि फिर वेतन आयोग को न्यूनतम वेतन जो अभी तकरीबन 10000 रूपए है उसे छोड़ कर अपनी गणना 26000 रूपए से करनी होगी जैसे कि कर्मचारी संगठन मांग कर रहे है । अगर ऐसा होता है तो केंद्रीय कर्मचारियों के लिए लाभ ही लाभ है । कर्मचारी संगठन इस बात का दावा भी कर रहे है कि वेतन आयोग ग्रेड पे और पे बैड को भी बदल कर पुराने तरीके के वेतनमानों की बहाली भी कर सकता है इस से कर्मचारियों को लाभ तो होगा ही पर वरिष्ट कर्मचारी अपने कनिष्ठ कर्मचारी से काफी फायदा महसूस करेगा जिसको छठे वेतन आयोग ने तकरीबन खत्म कर दिया था
आयोग के अध्यक्ष के सामने वहुत बडी चुनौती है कि वह इतने सारे कर्मचारियों के वर्ग के बीच कैसे संतुलन बनाएं लेकिन इतना तय है कि इस बार सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाहें इतनी बढ़ जाएगी कि बाकी लोग दांतों तले उंगली दबाते रह जाएंगे।
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